सेना के पदक का राजनितिक इस्तेमाल नही कर सकते है पूर्व सैनिक | Don't wear medals, ribbons at public functions: Indian Army's advisory for ex-servicemen

सेना के पदक का राजनैतिक इस्तेमाल नही कर सकते है पूर्व सैनिक

देश की रक्षा करने वाले भारतीय सेना के बहादुर जवान अक्सर ही बेहद कठिन परिस्थितियों में अपनी ड्यूटी करते आ रहे है। कई बार तो ये परिस्थितियां इतनी कठिन होती है कि एक आम आदमी इन परिस्थितियों में रह भी न पाए। बावजूद इसके भारत माँ के वीर सपूत देश की हिफाजत करते है। हर वक़्त दुश्मन से जान का खतरा के साथ ही मौसम का खतरा जवानों के लिए मुश्किल हालात पैदा करता है । फिर भी भारतीय सेना के जवान देश के रक्षा हेतु अपने कर्तव्यों पर डटा रहता है।

सेना का फर्ज यही तक सिमित नही होता बल्कि सेना ये भी ध्यान रखती है कि वो राजनितिक मामलो का शिकार होने या उनमे दखल अंदाजी देने से परहेज करे। अपने इन्ही कर्तव्यों का ध्यान रखते हुए अभी हांल ही में भारतीय सेना ने एक एडवाइजरी जारी की है।

क्या है भारतीय सेना द्वारा जारी एडवाइजरी

इस एडवाइजरी के मुताबिक राजनितिक रैलियों या विरोध-प्रदर्शनों में भूतपूर्व सैनिक अपने मेडल्स या रिबन न पहने। आज हम लोग Naukri–Indicator के लेख में जानेंगे की भारतीय सेना ने इस संबंध में क्या एडवाइजरी जारी की है और इसके क्या मायने है।

आपने अक्सर देखा होगा की बहुत से रैलियों तथा विरोध-प्रदर्शनों में भूतपूर्व सैनिक अपने मेडल्स और रिबनस पहन कर रैलियों अथवा विरोध-प्रदर्शनो में प्रदर्शन करते दिखाई देते है । इसे देखते हुए भारतीय सेना पूर्व सैनिकों के पदक एवं रिबन पहनने के सम्बन्ध में एक एडवाइजरी जारी किया है । इस एडवाइजरी के अनुसार पूर्व सैनिकों के द्वारा पदको और रिबनो को सेना के नियमो के अनुसार ही पहना जाये।

सेना द्वारा जारी एडवाइजरी के नियम

सेना के नियमो के मुताबिक पूर्व सैनिकों को अपने पदक अथवा रिबन को रैलियों या विरोध-प्रदर्शनो में पहनने की इजाजत नही दी जाती है। अभी तक ये परंपरा चली आ रही है कि सेना अपने राजनैतिक इस्तेमाल से परहेज करती आ रही है। सेना में काम कर रहा, कोई भी अफसर अपने आप को राजनितिक बयानों से बचाता आ रहा है। परंतु कुछ मामले ऐसे रहे है जब कुछ अधिकारियो या जवानों द्वारा सिस्टम के समर्थन या विरोध में खुले तौर पर अपनी राय जाहिर की है लेकिन फिर भी ऐसे मामले बहुत कम है। लेकिन फिर भी विशेषज्ञों का ऐसा मानना है कि सेना की निष्पक्षता पर सवाल न उठे, और इसके लिए जरुरी है कि सेना अपने आप को राजनैतिक मामलो से दूर रखें। साथ ही उसकी यह भी कोशिश हो की किसी भी संस्था, व्यक्ति या राजनैतिक दल द्वारा उसका इस्तेमाल न हो सके। सेना की ये एक ऐसी परंपरा रही है कि जिसे आजादी के 75 सालो बाद भी भारतीय सेना ने इसे सहज कर रखा है।

भारतीय सेना द्वारा एडवाइजरी जारी करने का कारण

सेना की एडवाइजरी इसलिए जारी की गयी जब पिछले कुछ समय में पूर्व सैनिकों को राजनितिक रैलियों और विरोध-प्रदर्शनों में सैनिक वर्दी , पदको और रिबनो में देखा गया। ताजा मामला राष्ट्रिय राजधानी दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन का है। इस आंदोलन में सेना के कई पूर्व सैनिक , अपने सैनिक वर्दी में है और कई सैनिको ने अपने पदक और रिबन पहन रखे थे।

भारतीय आर्मी के बारे में

आपको याद होगा की बीते 15 जनवरी को भारतीय सेना ने अपना सेना दिवस मनाया। यह भारतीय सेना का 73वां सेना स्थापना दिवस था । भारतीय सेना 15 जनवरी 1949 से ही पूरी तरह ब्रिटिश सेना से पूरी तरह मुक्त हुई थी साथ ही 15 जनवरी 1949 को KM KARIYAPPA कमांडर इन चीफ बने थे। इस तरह लेफ्टिनेन्ट करियप्पा लोकतान्त्रिक भारत के पहले सेना प्रमुख बने थे। तब से इस दिन को सेना दिवस के रूप में मनाया जाता है। भारतीय सेना (Indian Army ) का गठन 1776 में ईस्ट इंडिया कंपनी (East India Company) ने कोलकता में किया था। वर्तमान समय में Indian Army के 53 कैंटोनमेंट और 9 आर्मी बेस है।

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